Thursday, 7 March 2013

ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

This is one the most soulful song ...i have  ever listen in my life ...........

ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनियाँ
ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनियाँ
ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनियाँ
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

हर एक जिस्म घायल, हर एक रूह प्यासी
निगाहो में उलझन, दिलों में उदासी
ये दुनियाँ हैं या आलम-ए-बदहवासी
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

जहाँ एक खिलौना हैं, इंसान की हस्ती
ये बस्ती हैं मुर्दा परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से मौत सस्ती 
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

जवानी भटकती हैं बदकार बन कर
जवां जिस्म सजते हैं बाजार बनकर
यहाँ प्यार होता हैं व्योपार बनकर
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

ये दुनियाँ जहाँ आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं, दोस्ती कुछ नहीं हैं
यहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

जला दो इसे, फूँक डालो ये दुनियाँ
मेरे सामने से हटा लो ये दुनियाँ
तुम्हारी हैं तुम ही संभालो ये दुनियाँ
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

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